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  कैसे होगा कलियुग का अंत? हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, कलियुग अधर्म, पाप और लालच का युग है। जैसे-जैसे यह युग अपने चरम पर पहुँचेगा, मानवता और नैतिकता का पूरी तरह पतन हो जाएगा। जब धरती पर पाप असहनीय हो जाएगा, तब भगवान विष्णु 'कल्कि' अवतार के रूप में प्रकट होंगे। वे सफेद घोड़े पर सवार होकर आएँगे और अपनी तलवार से दुष्टों का विनाश करेंगे। कल्कि अवतार के माध्यम से अधर्म का नाश होगा और पुनः सत्ययुग की स्थापना होगी। यह अंत विनाशकारी होगा, लेकिन एक नई और पवित्र शुरुआत का मार्ग प्रशस्त करेगा। समय का यह चक्र निरंतर चलता रहता है, जहाँ अंत ही नए सृजन का आधार बनता है।
 2024  का राशिफल: मेष राशि (21 मार्च - 19 अप्रैल): वर्ष 2024 आपके लिए संघर्ष और सफलता का हो सकता है। आपको अपनी कड़ी मेहनत और उम्मीदों पर विश्वास रखना होगा। सावधानी बरतें और समय का सही तरीके से प्रबंधन करें। वृषभ राशि (20 अप्रैल - 20 मई): वर्ष 2024 आपके लिए सामाजिक संबंधों में मजबूती लाएगा। परिवार में समर्थन होगा और कार्य में सफलता प्राप्त होगी। स्वास्थ्य का ध्यान रखें और विश्राम का समय निकालें। मिथुन राशि (21 मई - 20 जून): आपकी बुद्धिमत्ता और आत्म-समर्पण से भरा रहेगा यह वर्ष। स्वास्थ्य का ध्यान रखें और नई क्षेत्रों में नए योजनाओं की शुरुआत करें। कर्क राशि (21 जून - 22 जुलाई): परिवार और करियर में संतुलन बनाए रखने के लिए समर्थन मिलेगा। आपको नए कार्य क्षेत्र में अपनी क्षमताओं को निखारने का मौका मिलेगा। सिंह राशि (23 जुलाई - 22 अगस्त): करियर में नए मील के स्तम्भ मिल सकते हैं। आपकी नेतृत्व और कार्य क्षमताएं चमकेंगी। संबंधों में समर्थन बनाए रखें और स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दें। कन्या राशि (23 अगस्त - 22 सितंबर): यह वर्ष आपके लिए वित्तीय स्थिति में सुधार लाएगा। कार्य क्षेत्र म...
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  ज्योतिष: आकाशीय गतिविधियों का अद्भूत अध्ययन ज्योतिष, यह एक ऐसा अद्भूत विज्ञान है जिसे हमारे समृद्धि और जीवन की दिशा को जानने के लिए अपनाया जा सकता है। यह एक प्राचीन विद्या है जो चांद्रमा, सूर्य, ग्रह और नक्षत्रों की गतिविधियों पर आधारित है। इस लेख में, हम ज्योतिष के महत्वपूर्ण पहलुओं की चर्चा करेंगे और यह देखेंगे कि इसमें कैसे आकाशीय गतिविधियों का अध्ययन हमारे जीवन को पूरी तरह से प्रभावित कर सकता है। ज्योतिष का मूल तत्व: ज्योतिष का शब्दिक अर्थ होता है "ज्योति" और "ईश" यानी "ज्योति का ईश"। इसका मतलब है कि ज्योतिष एक विज्ञान है जो स्वर्गीय शरीरों और उनकी चमकती हुई गतिविधियों का अध्ययन करता है। यह भविष्यवाणी, जन्मकुंडली और ग्रहों की स्थिति का विश्लेषण करके हमें बताता है कि कैसे हमारा जीवन व्यत्यास प्राप्त कर सकता है। ज्योतिष में ग्रहों का खास महत्व है, जो हमारे जीवन को प्रभावित करने वाले होते हैं। सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु और केतु इन ग्रहों का समूह होता है, और इनकी स्थिति और गतिविधियों के माध्यम से हमारा भविष्य पूर्वानुमान किया जा सकत...

मेहंदीपुर बालाजी मंदिर का इतिहास हर रोज होती हैं आश्चर्यचकित घटनाएं

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 वैसे तो इस कलयुग में हर रोज कुछ न कुछ ऐसा होता है जो लोगों के समझ से परे है आखिर ऐसा क्यों होता है? अध्यात्म के क्षेत्र में ही नहीं बल्कि हर क्षेत्र  में भी आज दुनिया इतना आगे चली गई है कि जिन्हें आश्चर्य ही समझा जाता है ।हम जानते हैं हमारे बजरंगबली इस कलयुग में अपने भक्तों की रक्षा के लिए भगवान श्री राम के आदेश पर जीवित रूप में उपस्थित है । बस आवश्यकता इस बात की हम बजरंगबली को सच्चे हृदय से पुकारे। हमारे देश में हनुमान जी के अनेक मंदिर हैं जो किसी न किसी चमत्कार के लिए प्रसिद्ध है ।इन्हीं मंदिरों में से एक मंदिर है राजस्थान के दौसा जिले में स्थित मेहंदीपुर बालाजी का मंदिर ।ऐसा माना जाता है कि इस मंदिर में स्थित बजरंगबली की बाल रूप की मूर्ति को किसी कलाकार ने नहीं बनाया  बल्कि स्वयंभू है ।दो सूरम्य  पहाड़ियों के बीच स्थित है, इसलिए इसे घाटा मेहंदीपुर बालाजी मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। मूर्ति के बाएं तरफ सीने में एक सूक्ष्म छिद्र है जिसमें से जल की धारा निरंतर बहती रहती है जो की मूर्ति के  चरण के पास रखे हुए कुंड में इकट्ठा होती है। इस जल की धारा को लोग प्र...

लॉकडाउन में महिला भक्त की बजरंगबली ने ऐसे की मदद

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आखिर क्यों नहीं मिलता है आपको पूजा का फल.

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 वर्तमान समय में  हर व्यक्ति किसी न किसी समस्या से जूझ रहा है और वह उन समस्याओं से निजात पाने के लिए भगवान की शरण में अवश्य जाता है। बात करें इस कलयुग की तो इस घोर कलयुग में सबसे ज्यादा पूजा-पाठ हनुमान जी की होती है क्यो कि वह जीवित रूप में पृथ्वी पर विद्यमान है ।लेकिन कई बार ऐसा होता है कि हम पूजा पाठ करते तो हैं लेकिन हमें उसका फल नहीं मिलता है। आखिर क्या कारण है इसका? अगर आप भी हनुमान चालीसा पढ़ते हैं हनुमान जी की सेवा में लगे रहते हैं लेकिन बावजूद इसके आपकी समस्या का समाधान नहीं हो रहा है तो  कुछ कारणों की वजह से फल नहीं मिल रहा।  1. एकाग्रता  हम जब पाठ करने बैठते हैं तो हमें पाठ करते समय ही इधर-उधर की बातें हमारे दिमाग में आने लगती हैं और हमारा ध्यान भंग हो जाता है जिससे हमारी पूजा पूरी नहीं होती है जिससे  2.भरोसा का न होना  दूसरी बात है कि भरोसा का ना होना ।आप पूजा-पाठ तो बहुत करते हैं लेकिन  हृदय में विश्वास नहीं है कि आपकी मनोकामना पूर्ण होगी अगर आप किसी संदेह के साथ भगवान की पूजा करेंगे तो आपको कभी भी उस पूजा में सफलता नहीं मिलेगी।  ...

वाराणसी के बनकटी हनुमान मंदिर का इतिहास

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काशी धर्म और अध्यात्म की नगरी है ।यहां पर मंदिरों की कोई कमी नहीं है ।यहां हर गली में भगवान विराजते हैं।बात करें अगर बनकटी हनुमान मंदिर की तो यह दुर्गा मंदिर के ठीक पीछे स्थित है।  धार्मिक मान्यताओं के अनुसार  पहले यहां पर घोर जंगल हुआ करता था और उसी जंगल में से एक हनुमान जी की मूर्ति मिली थी इसलिए इस मंदिर का नाम बनकटी हनुमान मंदिर रखा गया। धार्मिक मान्यताओं अनुसार गोस्वामी तुलसीदास यहां पर पूजा करने आते थे।  इस मंदिर में हनुमान जी ने कोढी के रूप में तुलसीदास जी को दर्शन दिए था।बनकटी हनुमान मंदिर का जीर्णोद्धार सन 1972 में कराया गया था । इस मंदिर में एक विशाल पीपल का पेड़ भी है । मंदिर में हनुमान जी की उत्तर पूर्व दिशा में मूर्ति स्थापित है,  साथ में श्री राम,माता सीता और लक्ष्मण जी की मूर्ति भी विराजमान है  इसके साथ ही यहां पर एक शिवलिंग भी है ।यहां पर प्रत्येक मंगलवार और शनिवार भक्तों की भारी भीड़ होती है। वैसे भीड़ तो यहां प्रत्येक दिन होती है क्योंकि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जो 40 दिन लगातार मन्नत के साथ दिए जलाता है और 41 वें दिन विधि विधान सहित पूजा पा...