मेहंदीपुर बालाजी मंदिर का इतिहास हर रोज होती हैं आश्चर्यचकित घटनाएं
वैसे तो इस कलयुग में हर रोज कुछ न कुछ ऐसा होता है जो लोगों के समझ से परे है आखिर ऐसा क्यों होता है? अध्यात्म के क्षेत्र में ही नहीं बल्कि हर क्षेत्र में भी आज दुनिया इतना आगे चली गई है कि जिन्हें आश्चर्य ही समझा जाता है ।हम जानते हैं हमारे बजरंगबली इस कलयुग में अपने भक्तों की रक्षा के लिए भगवान श्री राम के आदेश पर जीवित रूप में उपस्थित है । बस आवश्यकता इस बात की हम बजरंगबली को सच्चे हृदय से पुकारे।
हमारे देश में हनुमान जी के अनेक मंदिर हैं जो किसी न किसी चमत्कार के लिए प्रसिद्ध है ।इन्हीं मंदिरों में से एक मंदिर है राजस्थान के दौसा जिले में स्थित मेहंदीपुर बालाजी का मंदिर ।ऐसा माना जाता है कि इस मंदिर में स्थित बजरंगबली की बाल रूप की मूर्ति को किसी कलाकार ने नहीं बनाया बल्कि स्वयंभू है ।दो सूरम्य पहाड़ियों के बीच स्थित है, इसलिए इसे घाटा मेहंदीपुर बालाजी मंदिर के नाम से भी जाना जाता है।
मूर्ति के बाएं तरफ सीने में एक सूक्ष्म छिद्र है जिसमें से जल की धारा निरंतर बहती रहती है जो की मूर्ति के चरण के पास रखे हुए कुंड में इकट्ठा होती है। इस जल की धारा को लोग प्रसाद के रूप में चरणामृत समझ कर अपने साथ ले जाते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मेहंदीपुर बालाजी का मंदिर लगभग 1000 साल पहले बना हुआ है ।मंदिर के महंत के
पूर्वज ने एक स्वप्न देखा । स्वप्न अवस्था में ही चल दिए उनको नहीं पता था कि वह कहां जा रहे हैं ।वहां पहुंचने के बाद उन्होंने एक विचित्र थी लीला देखी ।उन्होंने देखा कि हजारों दीपक जल रहे हैं, हाथी घोड़ो दिख रहे हैं ।वहीं पर बालाजी की तीन मूर्तियां देखी उन्होंने बाला जी को प्रणाम किया और वापस चले आए।वहां से आने के बाद उनको नींद नहीं आई उनके मन में एक डर सा बैठ गया। उसी समय उनको एक आवाज आई कि उठो मेरे मंदिर का निर्माण करो, मेरी सेवा करो मैं भक्तों की रक्षा के लिए आया हूं। यह सब बात उनको कौन कह रहा था वह देख नहीं पा रहे थे सिर्फ आवाज ही आ रही थी। अंत में हनुमान जी ने उनको स्वयं दर्शन दिया और मंदिर निर्माण की बात कही। दूसरे दिन महंत जी उस स्थान पर पहुंचे तो वहां पर उन्हें कुछ दिखाई ना दिया बस घंटों की आवाज सुनाई दे रही थी। महंत जी ने गांव वालों को इकट्ठा करके सारी घटना के बारे में बताया उसके बाद वहां पर मंदिर का निर्माण कराया।
ऐसी भी मान्यता है कि मेहंदीपुर बालाजी मंदिर से मिले हुए प्रसाद को खाने पर सारे रोग कष्ट दूर हो जाते हैं।
इस मंदिर की एक और परंपरा यह है कि अगर आप मंदिर से बाहर निकल रहे हैं तो पीछे मुड़कर नहीं देखना चाहिए ।मंदिर प्रांगण में आपको किसी से बात नहीं करना है और ना ही किसी भी व्यक्ति को छुना है यह सारे कार्य मेहंदीपुर बालाजी मंदिर में वर्जित है।
ऐसा माना जाता है कि अगर मनुष्य को किसी भी प्रकार की भूत प्रेत बाधा हो तो इस मंदिर में जाने से स्वतः ही शांत हो जाता है। अन्य मनोकामनाओं के लिए भी मेहंदीपुर में बालाजी मंदिर के दर्शन के लिए लोग जाते हैं और हनुमान जी का आशीर्वाद प्राप्त करके आते हैं।
मुस्लिम शासन काल में कई मुस्लिम शासकों ने इस मूर्ति को नष्ट करने की कोशिश की लेकिन वह जितना ही इस मूर्ति को नष्ट करने की कोशिश करते वह मूर्ति जमीन के अंदर चली जाती। थक हार कर उनको अपना यह को प्रयास छोड़ना पड़ा।



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