तुलसीदास ने ऐसे की थी हनुमान बाहुक की रचना
जैसा कि हम सब जानते हैं गोस्वामी तुलसीदास एक हनुमान भक्त थे। तुलसीदास ने बहुत सारी पवित्र पुस्तकों की रचना की जिसमें राम चरित्र मानस, सुंदरकांड, हनुमान चालीसा, हनुमान बाहुक इत्यादि है। दोस्तो क्या आपको पता है हनुमान बाहुक की रचना गोस्वामी तुलसीदास ने कैसे की?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गोस्वामी तुलसीदास संकट मोचन हनुमान मंदिर में बैठकर सुंदरकांड की रचना कर रहे थे और उसी समय उनके भुजाओं में दर्द होने लगा तो वह गुस्से में हनुमान वाहक की रचना कर दिए ,और रचना के बाद उनके भुजाओं का दर्द दूर हो गया ऐसा माना जाता है कि हनुमान जी चाहते थे कि तुलसीदास एक और पवित्र रचना करें इसलिए उनकी भुजाओं में रामचरितमानस लिखते समय दर्द शुरू हुआ और हनुमान बाहुक की रचना करने के बाद वह दर्द खत्म भी हो गया।
हनुमान बाहुक पढ़ने से बहुत लाभ होता है ।अगर आप किसी भी गंभीर बीमारी से पीड़ित है तो हनुमान बाहुक का संकल्प लें और उसे पढे तो रोग से मुक्ति मिल जाती है।
जय श्री राम जय हनुमान🙏🙏🙏


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