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मेहंदीपुर बालाजी मंदिर का इतिहास हर रोज होती हैं आश्चर्यचकित घटनाएं

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 वैसे तो इस कलयुग में हर रोज कुछ न कुछ ऐसा होता है जो लोगों के समझ से परे है आखिर ऐसा क्यों होता है? अध्यात्म के क्षेत्र में ही नहीं बल्कि हर क्षेत्र  में भी आज दुनिया इतना आगे चली गई है कि जिन्हें आश्चर्य ही समझा जाता है ।हम जानते हैं हमारे बजरंगबली इस कलयुग में अपने भक्तों की रक्षा के लिए भगवान श्री राम के आदेश पर जीवित रूप में उपस्थित है । बस आवश्यकता इस बात की हम बजरंगबली को सच्चे हृदय से पुकारे। हमारे देश में हनुमान जी के अनेक मंदिर हैं जो किसी न किसी चमत्कार के लिए प्रसिद्ध है ।इन्हीं मंदिरों में से एक मंदिर है राजस्थान के दौसा जिले में स्थित मेहंदीपुर बालाजी का मंदिर ।ऐसा माना जाता है कि इस मंदिर में स्थित बजरंगबली की बाल रूप की मूर्ति को किसी कलाकार ने नहीं बनाया  बल्कि स्वयंभू है ।दो सूरम्य  पहाड़ियों के बीच स्थित है, इसलिए इसे घाटा मेहंदीपुर बालाजी मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। मूर्ति के बाएं तरफ सीने में एक सूक्ष्म छिद्र है जिसमें से जल की धारा निरंतर बहती रहती है जो की मूर्ति के  चरण के पास रखे हुए कुंड में इकट्ठा होती है। इस जल की धारा को लोग प्र...

लॉकडाउन में महिला भक्त की बजरंगबली ने ऐसे की मदद

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आखिर क्यों नहीं मिलता है आपको पूजा का फल.

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 वर्तमान समय में  हर व्यक्ति किसी न किसी समस्या से जूझ रहा है और वह उन समस्याओं से निजात पाने के लिए भगवान की शरण में अवश्य जाता है। बात करें इस कलयुग की तो इस घोर कलयुग में सबसे ज्यादा पूजा-पाठ हनुमान जी की होती है क्यो कि वह जीवित रूप में पृथ्वी पर विद्यमान है ।लेकिन कई बार ऐसा होता है कि हम पूजा पाठ करते तो हैं लेकिन हमें उसका फल नहीं मिलता है। आखिर क्या कारण है इसका? अगर आप भी हनुमान चालीसा पढ़ते हैं हनुमान जी की सेवा में लगे रहते हैं लेकिन बावजूद इसके आपकी समस्या का समाधान नहीं हो रहा है तो  कुछ कारणों की वजह से फल नहीं मिल रहा।  1. एकाग्रता  हम जब पाठ करने बैठते हैं तो हमें पाठ करते समय ही इधर-उधर की बातें हमारे दिमाग में आने लगती हैं और हमारा ध्यान भंग हो जाता है जिससे हमारी पूजा पूरी नहीं होती है जिससे  2.भरोसा का न होना  दूसरी बात है कि भरोसा का ना होना ।आप पूजा-पाठ तो बहुत करते हैं लेकिन  हृदय में विश्वास नहीं है कि आपकी मनोकामना पूर्ण होगी अगर आप किसी संदेह के साथ भगवान की पूजा करेंगे तो आपको कभी भी उस पूजा में सफलता नहीं मिलेगी।  ...

वाराणसी के बनकटी हनुमान मंदिर का इतिहास

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काशी धर्म और अध्यात्म की नगरी है ।यहां पर मंदिरों की कोई कमी नहीं है ।यहां हर गली में भगवान विराजते हैं।बात करें अगर बनकटी हनुमान मंदिर की तो यह दुर्गा मंदिर के ठीक पीछे स्थित है।  धार्मिक मान्यताओं के अनुसार  पहले यहां पर घोर जंगल हुआ करता था और उसी जंगल में से एक हनुमान जी की मूर्ति मिली थी इसलिए इस मंदिर का नाम बनकटी हनुमान मंदिर रखा गया। धार्मिक मान्यताओं अनुसार गोस्वामी तुलसीदास यहां पर पूजा करने आते थे।  इस मंदिर में हनुमान जी ने कोढी के रूप में तुलसीदास जी को दर्शन दिए था।बनकटी हनुमान मंदिर का जीर्णोद्धार सन 1972 में कराया गया था । इस मंदिर में एक विशाल पीपल का पेड़ भी है । मंदिर में हनुमान जी की उत्तर पूर्व दिशा में मूर्ति स्थापित है,  साथ में श्री राम,माता सीता और लक्ष्मण जी की मूर्ति भी विराजमान है  इसके साथ ही यहां पर एक शिवलिंग भी है ।यहां पर प्रत्येक मंगलवार और शनिवार भक्तों की भारी भीड़ होती है। वैसे भीड़ तो यहां प्रत्येक दिन होती है क्योंकि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जो 40 दिन लगातार मन्नत के साथ दिए जलाता है और 41 वें दिन विधि विधान सहित पूजा पा...

शीघ्र विवाह हेतु करें मंगला गौरी मां का दर्शन

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इस लॉकडाउन में हनुमान जी ने ऐसे की इस महिला भक्तों की रक्षा

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 संकट कटे मिटे सब पीरा, जो सुमिरे हनुमत बलबीरा यह सिर्फ पंक्तियां ही नहीं अगर सच्चे दिल से इसे स्मरण किया जाए तो बजरंगबली निश्चित रूप से साथ देते हैं इसमें तनिक भी संशय नहीं। आज की यह कहानी हमें भेजी है सरिता शर्मा ने जो कि गुड़गांव में रहती हैं सरिता शर्मा कहती हैं कि वैसे तो मैं बचपन से ही  हर भगवान की पूजा करती थी ।हमेशा भगवान ने मेरा साथ दिया है । मुझे ऐसा महसूस हुआ कि जब भी मैं किसी मुसीबत में होती थी और हनुमान जी के मंदिर जाती तो मुझे बहुत सुकून मिलता था और मेरी हर समस्या भी दूर हो जाती थी।वैसे तो हमारे बजरंगबली  ने  बहुत सारी कृपा किए लेकिन एक ऐसा अनुभव में आपको बताना चाहती हूं जिस पर मुझे विश्वास नहीं होता है।   यह बात अप्रैल 2020 की है उस समय लॉकडाउन  शुरू हुए कुछ ही समय हुआ था ।जैसा कि आपको भी पता है कि 22 मार्च के बाद सारे ऑफिस लॉकडाउन के वजह से बंद था। मेरा नाम  सरिता  शर्मा है   मेरे हस्बैंड एक कंपनी में मैनेजिंग हेड  हैं और मैं उनके साथ गुड़गांव मैं रहती हूं। सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा था लॉकडाउन के वजह से मेरे  ह...

मनचाहा वर पाने के लिए ऐसे करें तुलसी विवाह

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 वैसे तो हिंदू धर्म में हर त्यौहार को अपना ही अलग महत्व है लेकिन अगर बात करें तुलसी विवाह की तो  इसका भी बहुत महत्वपूर्ण स्थान है। 2020 में तुलसी विवाह 25 नवंबर दिन बुधवार ( देवउठनी एकादशी) को है।  धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अगर किसी लड़की का विवाह नहीं हो पा रहा है किसी भी कारणवश तो अगर वह कन्या तुलसी विवाह के दिन तुलसी विवाह विधिवत करे तो उसे शीघ्र ही वर प्राप्ति हो जाती है ।इसके लिए तुलसी विवाह के दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान आदि कर्मों से निवृत्त होकर मां तुलसी की पूजा करें और संभव हो तो उस दिन व्रत भी करें ,और शाम के समय तुलसी का विवाह विधिवत चुनरी ओढ़ाकर और श्रृंगार की समस्त सामग्री के साथ करें और अपने विवाह की प्रार्थना करें तो ऐसा करने से कुंवारी कन्याओं का विवाह शीघ्र अति शीघ्र हो जाता है। अगर किसी दंपत्ति के जीवन में भी किसी तरह की समस्या है जैसे बार-बार किसी बात को लेकर लड़ाई झगड़ा इत्यादि हो रहा हो तो वह दंपत्ति भी अगर तुलसी विवाह के दिन तुलसी का विवाह विधिवत करे तो रिश्ते में मधुरता बनी रहती है। ऐसा भी माना जाता है कि जिस दंपत्ति का विवाह तुलसी विवाह के ...